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किराया कानून की कार्रवाई के बिना भी संपत्ति खाली करा सकता है लिक्विडेटर, NCLAT ने NCLT के आदेश को रखा बरकरार

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Sep 23, 2026 06:54 am IST,  Updated : Sep 23, 2026 07:20 am IST

NCLT ने ड्यूक फैशन्स और यूवीएंडडब्ल्यू प्रोडक्ट्स को कराबारा और हुसैनपुरा स्थित दो कमर्शियल प्रॉपर्टी दो हफ्तों के भीतर खाली करने का निर्देश दिया था।

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एनसीएलएटी ने खारिज की ड्यूक फैशन्स और यूवीएंडडब्ल्यू प्रोडक्ट्स की अपील Image Source : FREEPIK

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने कहा है कि किसी कंपनी के परिसमापक (Liquidator) को कॉरपोरेट देनदार की संपत्तियों पर कब्जा लेने के लिए किराया नियंत्रण कानून के तहत अलग कार्यवाही करने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामले में वो सीधे एनसीएलटी के जरिए संपत्ति खाली करा सकता है। 

एनसीएलएटी ने खारिज की ड्यूक फैशन्स और यूवीएंडडब्ल्यू प्रोडक्ट्स की अपील

एनसीएलएटी की दो-सदस्यीय पीठ ने लुधियाना की दो कंपनियों- ड्यूक फैशन्स और यूवीएंडडब्ल्यू प्रोडक्ट्स की अपील खारिज करते हुए इस मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की चंडीगढ़ पीठ के आदेश को बरकरार रखा। 

ड्यूक फैशन्स और यूवीएंडडब्ल्यू प्रोडक्ट्स ने NCLT के आदेश को NCLAT में दी थी चुनौती

NCLT ने ड्यूक फैशन्स और यूवीएंडडब्ल्यू प्रोडक्ट्स को कराबारा और हुसैनपुरा स्थित दो कमर्शियल प्रॉपर्टी दो हफ्तों के भीतर खाली करने का निर्देश दिया था। दोनों कंपनियों ने इस आदेश को अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में चुनौती देते हुए कहा था कि 30 साल के पट्टा विलेख (लीज डीड) के तहत उन्हें किरायेदारी का अधिकार हासिल है और बेदखली की कार्यवाही 1949 के ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रिस्ट्रिक्शन एक्ट के तहत किराया नियंत्रक के समक्ष ही की जा सकती है। 

लीज डीड रजिस्टर्ड नहीं थीं, इसलिए उन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता

हालांकि, एनसीएलएटी ने दोनों ही कंपनियों की ये दलील खारिज कर दी। एनसीएलएटी ने कहा कि संबंधित लीज डीड रजिस्टर्ड नहीं थीं, लिहाजा उन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायाधिकरण ने ये भी कहा कि दोनों अपीलकर्ता कंपनियों के निदेशक कॉरपोरेट देनदार के निलंबित निदेशकों के करीबी रिश्तेदार थे। 

कॉरपोरेट देनदार की संपत्तियों पर कब्जा लेना परिसमापक का अनिवार्य वैधानिक दायित्व

अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) की धारा 35 के तहत कॉरपोरेट देनदार की संपत्तियों पर कब्जा लेना परिसमापक का अनिवार्य वैधानिक दायित्व है। आईबीसी की धारा 238 का अन्य कानूनों पर अधिभावी प्रभाव है। 

वीनस गारमेंट्स (इंडिया) से जुड़ा हुआ है मामला

बताते चलें कि ये मामला वीनस गारमेंट्स (इंडिया) से जुड़ा हुआ है। वीनस गारमेंट्स (इंडिया) को एनसीएलटी की चंडीगढ़ बेंच ने कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) में लिया था और बाद में 22 जुलाई, 2025 को उसके परिसमापन का आदेश दिया गया था।

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